CTET का सबसे महत्वपूर्ण अध्याय: पियाजे, कोहलबर्ग और वायगोत्स्की
प्रस्तावना (Introduction)
यदि आप CTET, UPTET या किसी भी शिक्षक पात्रता परीक्षा की तैयारी कर रहे हैं, तो यह अध्याय आपके सिलेबस की रीढ़ (Backbone) है। बाल विकास और शिक्षाशास्त्र (CDP) के 30 प्रश्नों में से लगभग 5 से 8 प्रश्न केवल तीन मनोवैज्ञानिकों के सिद्धांतों से आते हैं: जीन पियाजे, लेव वायगोत्स्की और लॉरेंस कोहलबर्ग।
इस विस्तृत गाइड में, हम इन तीनों सिद्धांतों को रटने के बजाय गहराई से समझेंगे, ताकि आप परीक्षा में किसी भी घुमावदार प्रश्न का उत्तर आसानी से दे सकें।
भाग 1: जीन पियाजे का संज्ञानात्मक विकास का सिद्धांत (Jean Piaget’s Cognitive Development Theory)
जीन पियाजे (स्विट्जरलैंड) को ‘विकासात्मक मनोविज्ञान का जनक’ कहा जाता है। उनका मानना था कि बच्चों का विकास उनकी उम्र (Age) और परिपक्वता (Maturation) के साथ होता है।
1.1 पियाजे की मुख्य विचारधारा
पियाजे का मानना था कि बच्चे “नन्हे वैज्ञानिक” (Little Scientists) होते हैं। वे निष्क्रिय होकर ज्ञान नहीं लेते, बल्कि अपने आसपास की दुनिया के साथ प्रयोग करके अपने ज्ञान का निर्माण सक्रिय रूप से करते हैं। इसे ‘निर्मितवाद’ (Constructivism) कहा जाता है।
1.2 सीखने की प्रक्रिया के 4 महत्वपूर्ण शब्द
पियाजे ने बताया कि बच्चे कैसे सीखते हैं, इसके लिए 4 प्रक्रियाएं जिम्मेदार हैं:
- स्कीमा (Schema):
- यह हमारे दिमाग में सूचनाओं का एक पैकेट या ‘फोल्डर’ है। जो भी हम जानते हैं (जैसे- बिल्ली कैसी दिखती है, स्कूल में कैसे बैठना है), वह सब स्कीमा है।
- उदाहरण: एक बच्चे के दिमाग में स्कीमा है कि “जानवर के 4 पैर होते हैं।”
- आत्मसात्करण (Assimilation):
- जब बच्चा अपने पुराने ज्ञान (स्कीमा) में नई जानकारी को ज्यों का त्यों जोड़ लेता है।
- उदाहरण: बच्चे ने एक ‘सफेद कुत्ते’ को देखा और कहा “कुत्ता”। फिर उसने ‘काले कुत्ते’ को देखा और उसे भी “कुत्ता” कहा। यहाँ उसने नई जानकारी को पुराने ज्ञान में फिट कर लिया।
- समायोजन (Accommodation):
- जब पुरानी जानकारी काम नहीं आती, तो बच्चे को अपने स्कीमा में बदलाव (Change) या संशोधन करना पड़ता है।
- उदाहरण: बच्चे ने ‘बिल्ली’ को देखा और उसे भी “कुत्ता” कहा (क्योंकि उसके 4 पैर हैं)। लेकिन जब उसने उसकी आवाज़ “म्याऊँ” सुनी, तो उसने अपने स्कीमा को बदला—”हर 4 पैर वाला जानवर कुत्ता नहीं होता, यह बिल्ली है।” इसे समायोजन कहते हैं।
- साम्यधारण (Equilibration):
- यह आत्मसात्करण और समायोजन के बीच संतुलन बनाने की प्रक्रिया है। जब नई जानकारी दिमाग में फिट हो जाती है, तो संतुलन बनता है।
1.3 पियाजे की 4 अवस्थाएं (Stages of Development)
पियाजे के अनुसार, हर बच्चे का विकास इन 4 चरणों से होकर गुजरता है। यह क्रम बदला नहीं जा सकता।
(A) संवेदी-गामक अवस्था (Sensorimotor Stage)
- उम्र: 0 से 2 वर्ष
- विशेषता:
- बच्चा अपनी ज्ञानेंद्रियों (आंख, कान, नाक, त्वचा, जीभ) के माध्यम से सीखता है।
- वस्तु स्थायित्व (Object Permanence): इस अवस्था के अंत तक (लगभग 8-9 महीने बाद) बच्चे में यह समझ आ जाती है कि अगर कोई खिलौना छिपा दिया गया है, तो वह गायब नहीं हुआ है, बल्कि वहीं मौजूद है। वह उसे ढूंढने लगता है।
- विलंबित अनुकरण (Deferred Imitation): बच्चा बड़ों की नकल करना शुरू कर देता है।
(B) पूर्व-संक्रियात्मक अवस्था (Pre-operational Stage)
- उम्र: 2 से 7 वर्ष
- विशेषता:
- जीववाद (Animism): बच्चा निर्जीव चीजों को सजीव समझता है। (जैसे—”गुड़िया को चोट लग गई”, “बादल मेरा पीछा कर रहे हैं”)।
- अहं-केंद्रित (Egocentrism): बच्चा सोचता है कि पूरी दुनिया वैसे ही सोचती है जैसे वह सोचता है। उसे दूसरों का नज़रिया समझ नहीं आता।
- अपलटावी गुण (Irreversibility): बच्चा घटनाओं को पलट कर नहीं सोच सकता। (जैसे—वह जानता है कि 2 + 2 = 4, लेकिन यह नहीं समझ पाता कि 4 – 2 = 2 होगा)।
- केंद्रीयकरण (Centration): वह किसी चीज़ की केवल एक विशेषता पर ध्यान देता है। (जैसे—लंबा गिलास ज्यादा पानी रखता है, भले ही चौड़े गिलास में पानी बराबर हो)।
(C) मूर्त संक्रियात्मक अवस्था (Concrete Operational Stage)
- उम्र: 7 से 11 वर्ष
- विशेषता:
- तर्क (Logic) की शुरुआत: बच्चा अब तार्किक रूप से सोचने लगता है, लेकिन केवल उन चीजों के बारे में जो उसके सामने (मूर्त/Concrete) हैं।
- संरक्षण (Conservation): अब बच्चा समझ जाता है कि बर्तन का आकार बदलने से पानी की मात्रा नहीं बदलती।
- पलटावी गुण (Reversibility): अब वह उल्टा सोच सकता है (बर्फ पानी बन सकता है और पानी फिर से बर्फ)।
- वर्गीकरण (Classification): चीजों को उनके आकार, रंग या प्रकार के अनुसार अलग-अलग करना सीख जाता है।
(D) अमूर्त संक्रियात्मक अवस्था (Formal Operational Stage)
- उम्र: 11 से 15+ वर्ष
- विशेषता:
- अमूर्त चिंतन (Abstract Thinking): अब बच्चा उन चीजों के बारे में भी सोच सकता है जो उसने देखी नहीं हैं (जैसे—स्वतंत्रता, लोकतंत्र, भविष्य)।
- परिकल्पनात्मक निगमनात्मक तर्क (Hypothetical Deductive Reasoning): वह समस्याओं का समाधान करने के लिए परिकल्पना (Hypothesis) बनाता है और वैज्ञानिक ढंग से सोचता है।
भाग 2: लेव वायगोत्स्की का सामाजिक-सांस्कृतिक सिद्धांत (Lev Vygotsky’s Socio-Cultural Theory)
वायगोत्स्की (रूस) का सिद्धांत पियाजे से बिल्कुल उल्टा था। पियाजे ने कहा “उम्र बढ़ने पर विकास होता है”, जबकि वायगोत्स्की ने कहा “समाज से सीखने पर विकास होता है।”
2.1 मुख्य विचार
- सामाजिक अंतःक्रिया (Social Interaction): बच्चे का विकास अकेले में नहीं, बल्कि बड़ों और साथियों के साथ बातचीत करके होता है।
- संस्कृति (Culture): हमारी संस्कृति हमें सिखाती है कि क्या सोचना है और कैसे सोचना है।
2.2 वायगोत्स्की के 3 महत्वपूर्ण कॉन्सेप्ट
- ZPD (Zone of Proximal Development – समीपस्थ विकास का क्षेत्र):
- यह “बच्चा जो खुद कर सकता है” और “जो वह किसी की मदद से कर सकता है” के बीच का अंतर है।
- उदाहरण: एक बच्चा साइकिल चला सकता है लेकिन उसे मुड़ने में दिक्कत होती है। पापा ने पीछे से पकड़कर मुड़ना सिखाया। अब वह मुड़ भी लेता है। यह जो ‘गैप’ भरा गया, वह ZPD है।
- पाड़ / मचान (Scaffolding):
- यह अस्थायी मदद (Temporary Help) है जो बड़ों द्वारा बच्चे को दी जाती है।
- कैसे दी जाती है: संकेत देना, आधा सवाल हल करना, प्रोत्साहित करना।
- याद रखें: जब बच्चा खुद करने लगे, तो पाड़ (मदद) हटा ली जाती है।
- अधिक जानकार अन्य (MKO – More Knowledgeable Other):
- वह व्यक्ति जो बच्चे से ज्यादा जानता है (शिक्षक, माता-पिता, या यहाँ तक कि कंप्यूटर या कोई होशियार दोस्त)। बच्चा MKO से ही सीखता है।
2.3 भाषा और विचार (Language and Thought)
- पियाजे का मानना था कि विचार पहले आते हैं, भाषा बाद में।
- वायगोत्स्की का मानना था कि भाषा और विचार शुरू में अलग होते हैं (3 साल तक), फिर एक हो जाते हैं।
- निजी भाषण (Private Speech): जब बच्चा खुद से बोल-बोलकर बातें करता है। पियाजे ने इसे ‘अहं-केंद्रित’ कहकर बेकार माना, लेकिन वायगोत्स्की ने कहा कि यह बच्चे को अपने कार्यों को दिशा देने (Self-regulation) में मदद करता है।
भाग 3: पियाजे बनाम वायगोत्स्की (अंतर)
यह टेबल परीक्षा के लिए बहुत महत्वपूर्ण है:
| आधार | जीन पियाजे (Constructivist) | लेव वायगोत्स्की (Social Constructivist) |
|---|---|---|
| सीखने का आधार | उम्र और परिपक्वता (जैविक)। | समाज और संस्कृति (सामाजिक)। |
| विचार और भाषा | विचार पहले, भाषा बाद में। | भाषा और विचार अलग, बाद में मिलते हैं। |
| शिक्षक की भूमिका | नाममात्र (बच्चा खुद सीखेगा)। | महत्वपूर्ण (सुविधादाता/Facilitator)। |
| सीखने की दिशा | विकास -> अधिगम (Development leads to Learning)। | अधिगम -> विकास (Learning leads to Development)। |
| निजी भाषण | इसे अहं-केंद्रित (Egocentric) कहा। | इसे स्वनियमन (Self-Regulation) के लिए जरूरी माना। |
भाग 4: लॉरेंस कोहलबर्ग का नैतिक विकास का सिद्धांत (Kohlberg’s Moral Development)
कोहलबर्ग ने पियाजे के विचारों को आगे बढ़ाया। उन्होंने यह जानने की कोशिश की कि बच्चों में सही और गलत (Right and Wrong) की समझ कैसे विकसित होती है।
4.1 हाइन्ज की दुविधा (The Heinz Dilemma)
कोहलबर्ग ने बच्चों को कई कहानियां सुनाईं, जिनमें सबसे प्रसिद्ध “हाइन्ज” की थी।
- कहानी: हाइन्ज की पत्नी बीमार है। एक ही दवा उसे बचा सकती है, लेकिन दवा बेचने वाला उसे 10 गुना दाम पर बेच रहा है। हाइन्ज के पास पैसे नहीं हैं। क्या हाइन्ज को दवा चोरी करनी चाहिए?
- इस प्रश्न के उत्तर के आधार पर कोहलबर्ग ने नैतिकता को 3 स्तरों में बांटा।
4.2 नैतिक विकास के 3 स्तर और 6 चरण
Level 1: पूर्व-परंपरागत स्तर (Pre-Conventional Level)
(4 से 10 वर्ष – नैतिकता बाहरी होती है)
- चरण 1: दंड और आज्ञापालन (Punishment & Obedience): बच्चा चोरी इसलिए नहीं करेगा क्योंकि उसे मार पड़ेगी। नैतिकता डर पर आधारित है।
- चरण 2: साधनात्मक सापेक्षता (Instrumental Relativism / Tit for Tat): “अगर तूने मेरा टिफिन खाया, तो मैं तेरा पेन तोड़ दूंगा।” बच्चा अपने फायदे के लिए काम करता है।
Level 2: परंपरागत स्तर (Conventional Level)
(10 से 13 वर्ष – समाज के नियम सर्वोपरि हैं)
- चरण 3: अच्छा लड़का-अच्छी लड़की (Good Boy-Nice Girl): बच्चा चोरी इसलिए नहीं करेगा क्योंकि लोग उसे “चोर” (बुरा) कहेंगे। वह दूसरों की नजर में अच्छा बनना चाहता है।
- चरण 4: कानून और व्यवस्था (Law and Order): “चोरी करना गलत है क्योंकि यह कानून के खिलाफ है।” बच्चा नियमों का कठोरता से पालन करता है।
Level 3: उत्तर-परंपरागत स्तर (Post-Conventional Level)
(13 वर्ष से ऊपर – खुद का विवेक)
- चरण 5: सामाजिक अनुबंध (Social Contract): नियम लोगों की भलाई के लिए हैं। अगर किसी की जान बचाने के लिए नियम तोड़ना पड़े, तो तोड़ देना चाहिए। (हाइन्ज को चोरी करनी चाहिए)।
- चरण 6: सार्वभौमिक नैतिकता (Universal Ethical Principle): यह सबसे उच्च स्तर है। व्यक्ति अपनी जान की परवाह किए बिना मानवता और न्याय के लिए खड़ा होता है (जैसे- गांधी जी, नेल्सन मंडेला)। बहुत कम लोग यहाँ तक पहुँचते हैं।
4.3 कोहलबर्ग की आलोचना (Criticism)
कैरोल गिलिगन (Carol Gilligan) ने कोहलबर्ग की आलोचना की। उन्होंने कहा कि कोहलबर्ग ने केवल पुरुषों पर प्रयोग किए।
- पुरुषों की नैतिकता “न्याय” (Justice) पर आधारित होती है।
- महिलाओं की नैतिकता “देखभाल” (Care) पर आधारित होती है।
- इसलिए कोहलबर्ग का सिद्धांत लैंगिक पूर्वाग्रह (Gender Bias) से ग्रसित है।
निष्कर्ष (Conclusion)
एक शिक्षक के रूप में, आपको इन तीनों सिद्धांतों का मिश्रण कक्षा में प्रयोग करना चाहिए:
- पियाजे से सीखें: बच्चों को खुद प्रयोग करने का मौका दें।
- वायगोत्स्की से सीखें: बच्चों को समूह (Group) में काम करने दें और जहां जरूरत हो वहां मदद (Scaffolding) दें।
- कोहलबर्ग से सीखें: बच्चों के साथ नैतिक दुविधाओं पर चर्चा करें ताकि उनका नैतिक तर्क विकसित हो।
FAQ: अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
Q1: पियाजे और वायगोत्स्की में मुख्य अंतर क्या है?
Ans: पियाजे ‘उम्र’ और ‘खोज’ को महत्व देते हैं, जबकि वायगोत्स्की ‘समाज’ और ‘सहयोग’ को।
Q2: ‘पाड़’ (Scaffolding) शब्द किसने दिया?
Ans: यह अवधारणा जेरोम ब्रूनर ने दी थी, लेकिन इसका विस्तृत प्रयोग वायगोत्स्की के सिद्धांत में होता है।
Q3: कोहलबर्ग के अनुसार ‘अच्छा लड़का-अच्छी लड़की’ किस स्तर में आता है?
Ans: यह परंपरागत स्तर (Conventional Level) का हिस्सा है।
यह पोस्ट आपकी CTET तैयारी के लिए एक ‘रामबाण’ है। इसे बार-बार पढ़ें और कॉन्सेप्ट्स को समझें।
CTET Practice Set: बाल विकास और शिक्षाशास्त्र (CDP)
(Topic: पियाजे, वायगोत्स्की और कोहलबर्ग)
Q1. जीन पियाजे के अनुसार, ‘वस्तु स्थायित्व’ (Object Permanence) का गुण बालक के विकास की किस अवस्था में आता है?
A) संवेदी-गामक अवस्था (0-2 वर्ष)
B) पूर्व-संक्रियात्मक अवस्था (2-7 वर्ष)
C) मूर्त संक्रियात्मक अवस्था (7-11 वर्ष)
D) अमूर्त संक्रियात्मक अवस्था (11+ वर्ष)
Q2. लेव वायगोत्स्की के अनुसार, बच्चों के सीखने में सबसे महत्वपूर्ण भूमिका किसकी होती है?
A) आनुवंशिकता (Heredity)
B) सामाजिक अंतःक्रिया (Social Interaction)
C) शारीरिक परिपक्वता (Physical Maturation)
D) इनाम और सजा (Rewards and Punishment)
Q3. कोहलबर्ग के नैतिक विकास के किस चरण में बच्चा ‘अच्छा लड़का-अच्छी लड़की’ (Good Boy-Nice Girl) बनने की कोशिश करता है?
A) पूर्व-परंपरागत स्तर (Pre-conventional)
B) परंपरागत स्तर (Conventional)
C) उत्तर-परंपरागत स्तर (Post-conventional)
D) अमूर्त संक्रियात्मक स्तर
Q4. पियाजे के अनुसार, जब बच्चा पुरानी जानकारी (स्कीमा) में नई जानकारी को ज्यों का त्यों शामिल कर लेता है, तो इसे क्या कहते हैं?
A) समायोजन (Accommodation)
B) आत्मसात्करण (Assimilation)
C) साम्यधारण (Equilibration)
D) संगठन (Organization)
Q5. ‘पाड़’ या ‘मचान’ (Scaffolding) का क्या अर्थ है?
A) बच्चे को हमेशा के लिए मदद देना
B) सीखने में वयस्कों द्वारा दी गई अस्थायी मदद
C) बच्चे की गलतियों पर उसे दंड देना
D) बच्चे को रटने के लिए प्रोत्साहित करना
Q6. विकास की दिशा ‘सिर से पैर की ओर’ (Head to Toe) होती है। इस सिद्धांत को क्या कहते हैं?
A) प्रोक्सिमोडिस्टल (Proximodistal)
B) सिफैलोकोडल (Cephalocaudal)
C) निरंतरता का सिद्धांत
D) एकीकरण का सिद्धांत
Q7. निम्नलिखित में से कौन समाजीकरण (Socialization) का प्राथमिक कारक (Primary Agent) है?
A) विद्यालय
B) मीडिया
C) परिवार
D) सरकार
Q8. वायगोत्स्की के अनुसार ‘निजी भाषण’ (Private Speech) क्या दर्शाता है?
A) बच्चा अहं-केंद्रित है
B) बच्चा अपने कार्यों को निर्देशित करने के लिए भाषा का उपयोग कर रहा है
C) बच्चा मानसिक रूप से कमजोर है
D) बच्चे को बोलने में कठिनाई है
Q9. पियाजे की ‘मूर्त संक्रियात्मक अवस्था’ (Concrete Operational Stage) की प्रमुख विशेषता क्या है?
A) अमूर्त चिंतन
B) वस्तु स्थायित्व
C) संरक्षण (Conservation) की समझ
D) परिकल्पनात्मक तर्क
Q10. कोहलबर्ग के अनुसार, नैतिक विकास का वह स्तर जहाँ नैतिकता ‘दंड’ पर आधारित न होकर ‘स्व-विवेक’ (Self-conscience) पर आधारित होती है:
A) पूर्व-परंपरागत स्तर
B) परंपरागत स्तर
C) उत्तर-परंपरागत स्तर
D) संवेदी-गामक स्तर
उत्तर और व्याख्या (Answers with Explanation)
1. उत्तर: (A) संवेदी-गामक अवस्था
व्याख्या: पियाजे के अनुसार, लगभग 8-9 महीने की उम्र में बच्चा यह समझने लगता है कि छिपी हुई वस्तुएं भी अस्तित्व में रहती हैं।
2. उत्तर: (B) सामाजिक अंतःक्रिया
व्याख्या: वायगोत्स्की का मानना था कि बच्चे अपने समाज और संस्कृति के साथ बातचीत करके ही सीखते हैं।
3. उत्तर: (B) परंपरागत स्तर
व्याख्या: इस स्तर (10-13 वर्ष) पर बच्चा दूसरों की नज़रों में अच्छा दिखने और समाज की स्वीकृति पाने के लिए कार्य करता है।
4. उत्तर: (B) आत्मसात्करण
व्याख्या: आत्मसात्करण का अर्थ है नए ज्ञान को पुराने स्कीमा में बिना किसी बदलाव के फिट कर लेना।
5. उत्तर: (B) सीखने में वयस्कों द्वारा दी गई अस्थायी मदद
व्याख्या: यह वह मदद है जो बच्चे को तब दी जाती है जब वह अटकता है, और जैसे ही वह सीख जाता है, मदद हटा ली जाती है।
6. उत्तर: (B) सिफैलोकोडल
व्याख्या: सिफैलोकोडल सिद्धांत के अनुसार विकास सिर से शुरू होकर नीचे पैरों की तरफ बढ़ता है।
7. उत्तर: (C) परिवार
व्याख्या: परिवार बच्चे का पहला स्कूल होता है और यहीं से उसका समाजीकरण शुरू होता है।
8. उत्तर: (B) बच्चा अपने कार्यों को निर्देशित करने के लिए भाषा का उपयोग कर रहा है
व्याख्या: वायगोत्स्की के अनुसार, बच्चे खुद से बात करके अपने व्यवहार और सोच को नियंत्रित (Self-regulate) करते हैं।
9. उत्तर: (C) संरक्षण (Conservation) की समझ
व्याख्या: इस अवस्था (7-11 वर्ष) में बच्चा समझ जाता है कि रूप बदलने से मात्रा नहीं बदलती (जैसे पानी को अलग आकार के गिलास में डालने पर)।
10. उत्तर: (C) उत्तर-परंपरागत स्तर
व्याख्या: यह सर्वोच्च स्तर है जहाँ व्यक्ति अपने खुद के नैतिक सिद्धांतों और सार्वभौमिक मूल्यों का पालन करता है।
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