कार्यात्मक आकलन चेकलिस्ट (FACP) – विशेष शिक्षकों के लिए मास्टर गाइड
कार्यात्मक आकलन चेकलिस्ट (Functional Assessment Checklist for Programming – FACP) विशेष शिक्षा के क्षेत्र में एक क्रांतिकारी उपकरण है। इसका मुख्य उद्देश्य बौद्धिक अक्षमता (Intellectual Disability) वाले बच्चों का IQ आधारित आकलन करने के बजाय उनके कार्यात्मक स्तर (Functional Level) के आधार पर मूल्यांकन करना है ।
1. FACP का परिचय और विकास
- विकासकर्ता: इसे राष्ट्रीय मानसिक स्वास्थ्य विकलांग संस्थान (NIEPID/NIMH), सिकंदराबाद के विशेष शिक्षा विभाग द्वारा विकसित किया गया है ।
- मुख्य उद्देश्य: दिव्यांग बच्चों के लिए उनकी आयु और क्षमता के अनुसार व्यक्तिगत शिक्षा योजना (IEP) तैयार करना और उनकी प्रगति का समय-समय पर मूल्यांकन करना ।
2. दिव्यांग बच्चों का स्तर-वार वर्गीकरण (Grouping)
FACP बच्चों को उनकी आयु और योग्यता के आधार पर निम्नलिखित समूहों में विभाजित करता है:
| स्तर (Level) | आयु समूह (Age Group) | मुख्य विवरण |
| Pre-primary | 3 – 6 वर्ष | व्यक्तिगत, सामाजिक और शैक्षणिक कौशल पर अधिक ध्यान । |
| Primary-I | 7 – 10 वर्ष | उन बच्चों के लिए जो Pre-primary की 80% गतिविधियाँ पूरी कर लेते हैं । |
| Primary-II | 9 – 14 वर्ष | उन बच्चों के लिए जो 8 वर्ष के बाद भी 80% दक्षता प्राप्त नहीं कर पाते । |
| Secondary | 11 – 14 वर्ष | यह Primary-I और II से प्रोन्नत हुए बच्चों का मिश्रित समूह है । |
| Prevocational I & II | 15 – 18 वर्ष | बुनियादी कार्य कौशल और घरेलू गतिविधियों (Domestic activities) पर ध्यान । |
| Care Group | गंभीर दिव्यांगता | उन बच्चों के लिए जो बिस्तर पर हैं (Bedridden) और उन्हें बुनियादी देखभाल की आवश्यकता है । |
3. मूल्यांकन के प्रमुख क्षेत्र (Domains)
चेकलिस्ट की गतिविधियों को 5 मुख्य क्षेत्रों में बांटा गया है जो समाज में स्वतंत्र जीवन जीने के लिए आवश्यक हैं:
- व्यक्तिगत (Personal): स्वयं की देखभाल, भोजन और स्वच्छता
- सामाजिक (Social): बातचीत, व्यवहार और सामाजिक शिष्टाचार
- शैक्षणिक (Academic): पढ़ना, लिखना, समय और धन की पहचान
- व्यावसायिक (Occupational): घरेलू कार्य और बुनियादी काम की आदतें
- मनोरंजनात्मक (Recreational): खेल, संगीत और रचनात्मक गतिविधियाँ
4. स्कोरिंग और कोडिंग प्रणाली (Scoring System)
शिक्षक प्रत्येक गतिविधि का मूल्यांकन नीचे दिए गए कोड्स के आधार पर करते हैं:
- (+) हाँ (Yes): बच्चा बिना किसी मदद के स्वतंत्र रूप से कार्य करता है
- (C) संकेत (Occasional Cueing): हल्के संकेत या याद दिलाने पर कार्य करना
- (VP) मौखिक सहायता (Verbal Prompting): बोलकर निर्देश देने पर कार्य करना
- (PP) शारीरिक सहायता (Physical Prompting): हाथ पकड़कर या शारीरिक मदद से कार्य करना
- (-) नहीं (No): कार्य बिल्कुल नहीं कर पाना
- (NA) लागू नहीं (Not Applicable): वह कार्य जो बच्चे की स्थिति के कारण संभव नहीं है
- (NE) अवसर नहीं (No Exposure): कार्य सीखने का मौका नहीं मिला
5. प्रोन्नति (Promotion) के नियम
- 80% का मानदंड: किसी भी स्तर से अगले स्तर पर जाने के लिए छात्र को उस चेकलिस्ट की 80% गतिविधियाँ स्वतंत्र रूप से (+) या केवल हल्के संकेतों (C) के साथ पूरी करनी होती हैं
- मनोरंजन गतिविधियाँ: इन्हें प्रोन्नति के लिए नहीं गिना जाता क्योंकि ये रुचि पर आधारित होती हैं 。 इनके लिए A से E तक ग्रेड दिए जाते हैं
- समय सीमा: यह माना जाता है कि एक छात्र एक स्तर पर अधिकतम 3 वर्ष तक रह सकता है
निष्कर्ष
FACP विशेष शिक्षकों के लिए एक वरदान है क्योंकि यह प्रत्येक गतिविधि को स्पष्ट रूप से परिभाषित करता है, जिससे शिक्षण लक्ष्य (Teaching Goals) बनाना आसान हो जाता है । यह दिव्यांग बच्चों को आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में एक वैज्ञानिक दृष्टिकोण प्रदान करता है।
आधिकारिक स्रोत (Official Sources):
- संस्थान: यह चेकलिस्ट राष्ट्रीय मानसिक स्वास्थ्य विकलांग संस्थान (NIMH), सिकंदराबाद (अब NIEPID) के विशेष शिक्षा विभाग द्वारा विकसित की गई है ।
- उपकरण (Tool): कार्यात्मक आकलन चेकलिस्ट फॉर प्रोग्रामिंग (FACP) ।
- लेखक/विकासकर्ता: इसे 1994 में जयंती नारायण, विजयलक्ष्मी मायरेडी, राव और राजगोपाल द्वारा तैयार किया गया था।
- संदर्भ: यह जानकारी NIMH द्वारा जारी आधिकारिक ‘Guidelines for using the Checklist’ पर आधारित है ।
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